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कोरोना से ठीक हो चुके हैं तो भी संभल कर रहें, शरीर में एंटीबॉडी 100 दिनों तक ही टिकती है

कोरोना से ठीक हो चुके हैं तो भी संभल कर रहें, शरीर में एंटीबॉडी 100 दिनों तक ही टिकती है

अगर आप इस बात को लेकर आश्वस्त हैं कि आपको एक बार कोरोना संक्रमण हो चुका है और अब आगे नहीं होगा तो यह आपकी गलतफहमी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि कोविड-19 संक्रमण से शरीर में विकसित एंटीबॉडी औसतन 100 दिनों तक ही काम करता है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के महानिदेशक बलराम भार्गव ने इस बात की जानकारी दी है। आईसीएमआर के इस नये निष्कर्ष का आशय यह हुआ कि इन 100 दिनों के बाद कोरोना वायरस के दोबारा संक्रमण का खतरा ज्यादा होता है।

आईसीएमआर कोरोना वायरस के केसों के दोबारा संक्रमण को लेकर अनुसंधान कर रही है। इस पर आईसीएमआर प्रमुख बलराम भार्गव ने मंगलवार को कहा कि अब तक दोबारा संक्रमण के तीन मामलों की पहचान की गई है। इनमें मुंबई में दो और अहमदाबाद में एक मामला दर्ज किया गया है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद के महानिदेशक बलराम भार्गव ने कहा कि परिषद ने औसतन 100 दिनों की कटऑफ रखने का फैसला किया है, अगर ऐसा होता है तो कुछ अध्ययनों के अनुसार, एंटीबॉडी को चार महीने का जीवन भी माना जाएगा। भार्गव ने कहा, ‘दोबारा संक्रमण एक समस्या थी, जिसे पहली बार हांगकांग के एक मामले के माध्यम से वर्णित किया गया था। इसके बाद भारत में कुछ मामलों का वर्णन किया गया है- दो मुंबई में और एक अहमदाबाद में।’

उन्होंने आगे कहा कि हमें विश्व स्वास्थ्य संगठन यानी डब्ल्यूएचओ से कुछ आंकड़े मिले हैं, जो बताता है कि इस समय दुनिया में लगभग दो दर्जन दोबारा संक्रमण के मामले हैं। हम आईसीएमआर डेटाबेस को देख रहे हैं और उन लोगों का पता लगा रहे हैं, जिनके पास कुछ डेटा हैं। दोबारा संक्रमित होने वाले लोगों से टेलीफोन पर बात कर कुछ डाटा एकत्र करने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा दोबारा संक्रमण को लेकर अलग-अलग समय सीमा है। अभी तक यह कहीं भी तय नहीं हुआ है कि कोई व्यक्ति 90 दिन, 100 दिन या 110 दिन बाद दोबारा संक्रमित हो सकता है। मगर अब सरकार ने इसकी समय सीमा औसतन 100 दिन रखा है।इसके मुताबिक, 100 दिन बाद दोबारा संक्रमित होने का खतरा है।

डॉ. भार्गव ने यह भी कहा कि हमारे शोध में यह भी पाया गया है कि कोरोना वायरस लगातार रूप बदल रहा है, मगर यह मालूली परिवर्तन है और इससे कोविड-19 वैक्सीन की प्रभावशीलता पर कोई असर नहीं पड़ेग, जो वर्तमान में दुनिया भर के कई देशों में अलग-अलग फेज के ट्रायल में है। बता दें कि भारत में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार कमी देखने को मिल रही है, मगर इसके दोबारा संक्रमण के तीन नए मामले सामने आने से खतरा और बढ़ गया है। इसलिए अब भी लोगों को कोरोना से सावधानी बरतने की ज्यादा जरूरत है।

इससे पहले रविवार को केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा था कि आईसीएमआर ने दोबारा संक्रमण के मामलों पर अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञों की एक समिति बनाई है। उन्होंने अपने संडे संवाद के 5वें एपिसोड में अपने सोशल मीडिया अकाउंट्स पर लोगों के सवालों का जवाब देते हुए कहा था कि आईसीएमआर ने देश से पुन: संक्रमण के मामलों को देखने के लिए एक अध्ययन शुरू किया है और उनके परिणाम का इंतजार है।

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piyushsharma43043@gmail.com

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    March 30, 2020

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