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बिहार चुनाव में बागी बिगाड़ेंगे खेल? बनती बाजी को कहीं हार में न बदल दे… सबको सता रहा है डर

बिहार चुनाव में बागी बिगाड़ेंगे खेल? बनती बाजी को कहीं हार में न बदल दे… सबको सता रहा है डर

बिहार के विधानसभा चुनाव में विभिन्न दलों के बागी उम्मीदवार भी मैदान में ताल ठोक रहे हैं। जब अपने दल से मायूस हुए तो किसी और दल का दामन थाम लिया। कुछ ऐसे भी हैं, जिनकी दूसरे दल में भी बात नहीं बनी तो निर्दलीय ही अखाड़े में उतर गए। अब वे जिस दल से पहले जुड़े थे, उसी के उम्मीदवार के खिलाफ खड़े हो गए हैं। ऐसे बागी सभी दलों में हैं। इनमें सबसे अधिक भाजपा के हैं। अपनी ही पार्टी के खिलाफ विरोध झंडा बुलंद करने वाले ये बागी जीत का गणित बिगाड़ भी सकते हैं।

भाजपा : नौ को निकाला पर अभी और हैं चुनाव मैदान में
भाजपा की नीतियों व गठबंधन धर्म के खिलाफ जाकर चुनाव लड़ने वाले नेताओं की संख्या बढ़ती जा रही है। पार्टी ने अभी नौ नेताओं को चिह्नित कर भले ही छह साल के लिए निष्कासित कर दिया है लेकिन अब भी पहले ही चरण में पार्टी के कई नेता चुनावी मैदान में डटे हैं। जबकि दूसरे व तीसरे चरण के लिए ऐसे नेताओं को भी नाम वापसी तक का समय दिया गया है। अगर वे नाम वापस नहीं लेते हैं तो उनका भी निष्कासन तय है।

अभी पार्टी जो नेता बागी होकर मैदान में डटे हैं, उनमें रामेश्वर चौरसिया सासाराम से, राजेन्द्र सिंह दिनारा से, उषा विद्यार्थी पालीगंज से, श्वेता सिंह संदेश से, झाझा से रवीन्द्र यादव, जहानाबाद से इंदू कश्यप, अजय प्रताप जमुई, मृणाल शेखर अमरपुर तो अनिल कुमार बिक्रम से चुनाव लड़ रहे हैं। इसमें अजय प्रताप रालोसपा, अनिल कुमार निर्दलीय तो बाकी लोजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में डटे हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार अभी कुछ और नेता पहले चरण में ही चुनावी मैदान में डटे हैं। चुनाव लड़ रहे ये सभी भाजपा से परोक्ष-अपरोक्ष रूप से जुड़े हुए हैं। शेखपुरा से भाजपा नेता राजेन्द्र गुप्ता और पूर्व जिलाध्यक्ष दारो बिंद चुनावी मैदान में डटे हैं।

बड़हरा से पूर्व विधायक आशा देवी निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं, जबकि भाजपा नेता व प्रसिद्ध गायक भरत शर्मा ने निर्दलीय नामांकन किया है। मखदुमपुर सुरक्षित सीट से रानी कुमारी लोजपा तो शाहपुर से शोभा देवी, जगदीशपुर से पूर्व विधायक भाई दिनेश जाप से चुनावी मैदान में हैं। घोसी से आरएसएस पृष्ठभूमि वाले राकेश कुमार सिंह, इमागंज सुरक्षित से कुमारी शोभा सिन्हा लोजपा से तो वजीरगंज से राजीव कुमार जाप से चुनाव लड़ रहे हैं। रजौली सुरक्षित से अर्जुन राम, नवादा से शशि भूषण कुमार, गोविंदपुर से रंजीत यादव लोजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में डटे हैं। पिछली बार रंजीत की पत्नी भाजपा के टिकट पर चुनावी मैदान में थीं।

अभी और हैं कतार में
आने वाले दिनों में भाजपा में बागियों की संख्या में और वृद्धि होनी तय है। बांकीपुर से सुषमा साहू निर्दलीय चुनावी मैदान में उतरने का ऐलान कर चुकी हैं। मनेर से भाजपा नेता पूर्व विधायक श्रीकांत निराला तो बनियापुर से तारकेश्वर सिंह लोजपा से अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। दर्जन भर और सीटों पर नेताओं के नाम चल रहे हैं जो अभी पर्दे के पीछे हैं। पार्टी नेता भी यह मानते हैं कि पिछली बार 157 सीट की तुलना में इस बार भाजपा 110 सीटों पर ही चुनाव लड़ रही है। इसके अलावा कुछ का टिकट काटा गया है तो कई सीटों पर एक से अधिक दावेदार हैं। इस कारण बागियों की संख्या में वृद्धि होनी तय है।

जदयू : पहले चरण में ही कई सीटों पर बागी कर रहे दलीय को कमजोर
जदयू के बागी प्राय: हर चरण में दिखेंगे। लोकतंत्र के पांच वर्ष पर आने वाले इस महापर्व में टिकट नहीं मिलने वाले जदयू के ऐसे दर्जनभर से अधिक नेता हैं, जिन्होंने उम्मीदवारी नहीं मिलने पर बगावत कर दिया है। इनमें से आधार दर्जन ऐसे हैं जो पहले चरण में ही एनडीए प्रत्याशियों के जीत की राह में मुश्कलि खड़ा कर सकते हैं। ददन सिंह पहलवान डुमरांव से निर्दलीय उतर कर जदयू प्रत्याशी अंजुम आरा के सामने चुनौती पेश कर रहे हैं। कांग्रेस से जदयू में आए सुदर्शन को टिकट मिलने से जदयू के ही नेता डा. राकेश रंजन बागी हो गए हैं। वहीं पूर्व मंत्री भगवान सिंह कुशवाहा जगदीशपर से जदयू द्वारा कुसुमलता कुशवाहा को टिकट मिलने से बागी हो गए। लोजपा ने उन्हें टिकट देकर यहीं से उतार दिया। ऐसे में जदयू प्रत्याशी की राह आसान नहीं रही। निर्दलीय उतरे रंजन इस विस क्षेत्र में जदयू के प्रभारी थे। पूर्व मंत्री रामेश्वर पासवान ने निर्दलीय सिंकदरा, डा. रणविजय सिंह ने गोह से रालोसपा के टिकट से उतरकर जदयू से बगावत की है। जदयू की पूर्व महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष कंचन गुप्ता, जमुई जदयू के पूर्व जिला अध्यक्ष शिवशंकर चौधरी, पूर्व विधायक सुमित सिंह ने टिकट नहीं मिलने पर दल के फैसले पर नाराजगी निर्दलीय मैदान में कूदकर जाहिर की है।

राजद : बागी ठोक रहे पार्टी के खिलाफ चुनावी ताल
चुनावी सीजन में राजद से बगावत करने वाले अब उसी का खेल बिगाड़ने में जुट गए हैं। वे या तो जदयू, जाप सहित दूसरे दलों में प्रत्याशी बन गए हैं या फिर उनके प्रत्याशियों को जिताने में जुटे हैं। राजद छोड़ जदयू में शामिल होने वाले विधायक जयवर्धन यादव, चंद्रिका राय, प्रेमा चौधरी, महेश्वर यादव, फराज फातमी, अशोक कुमार के अलावा विधान पार्षद संजय प्रसाद, पूर्व विधायक विजेंदर यादव अब जदयू प्रत्याशी के रूप में राजद के खिलाफ चुनावी ताल ठोंक रहे हैं। गरखा के मौजूदा विधायक मुनेश्वर चौधरी भी पाला बदल चुके हैं। वो अब जाप के बैनर तले राजद के खिलाफ खम ठोंक रहे हैं। इसके अलावा राजद से इस्तीफा देने वाले सतेंद्र पासवान फुलवारी शरीफ से जाप के प्रत्याशी हैं। युवा राजद के महासचिव रहे सोना पासवान अब बनमनखी से जाप प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं। इसके अलावा शिवहर के जिलाध्यक्ष ठाकुर धर्मेंद्र सिंह ने भी राजद छोड़ रालोसपा का दामन थाम लिया है।

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piyushsharma43043@gmail.com

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