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अतीक-अशरफ हत्याकांड: जैद, भाटी गैंग और माफिया कनेक्शन का पर्दाफाश, साम्राज्य हथियाना हो सकता है मकसद

माफिया अतीक अहमद और अशरफ की हत्या क्यों की गई? लवलेश, सनी और अरुण ने ही आखिर क्यों मारा? हर जुबान पर यही सवाल है। अब इस दोहरे हत्याकांड में सबसे बड़ा एंगल कॉन्ट्रैक्ट किलिंग का आ रहा है। यानी अतीक और अशरफ की हत्या सुपारी देकर करवाई गई है।

इसके साथ ही एक बड़ा सवाल है कि आखिर मकसद क्या था…वर्चस्व, रसूख, आर्थिक साम्राज्य पर कब्जा, गैंग को नई पहचान या फिर कोई राज खुलने का डर। फिलहाल, इसके पीछे जिन गैंग के नाम आ रहे हैं- उनमें प्रयागराज का जैद गैंग, पश्चिमी यूपी का कुख्यात सुंदर भाटी गैंग और तीसरा कोई इंटरनेशनल माफिया है, लेकिन उसका नाम अभी सामने नहीं आया है। ये शक इसलिए है क्योंकि तीनों हमलावरों की अभी तक अतीक से कोई सीधी अदावत सामने नहीं आई है।

पुलिस इस एंगल पर जांच कर रही है कि तीनों हमलावरों को किसी गैंग ने कॉन्ट्रैक्ट किलिंग तो नहीं दी? शुरुआती जांच में ऐसा पता भी चला है कि हिस्ट्रीशीटर सनी सिंह जब हमीरपुर जेल में बंद था तो उसी जेल में लवलेश तिवारी एक बार बंद हुआ था। वहीं पर दोनों की दोस्ती हुई। जमानत पर छूटने के बाद दोनों आपस में मिले थे।

लवलेश और अरुण एक-दूसरे को पहले से जानते थे। इसके बाद लवलेश ने अरुण की मुलाकात सनी से करवाई। ये तीनों प्रयागराज और सोनभद्र भी आते-जाते रहते थे।

आइए जानते हैं आखिर अतीक-अशरफ की हत्या की वजहों में पुलिस किन एंगल पर जांच कर रही है?

यह तस्वीर हत्याकांड वाले दिन की है। हमलावरों ने मीडिया से बातचीत के दौरान दोनों की गोली मारकर हत्या की थी।
यह तस्वीर हत्याकांड वाले दिन की है।
हमलावरों ने मीडिया से बातचीत के दौरान दोनों की गोली मारकर हत्या की थी।

शुरुआती पूछताछ में तीनों हमलावरों ने कहा है कि वे अतीक-अशरफ की हत्या करके अपना नाम फेमस करना चाहते थे, लेकिन यह बात आसानी से गले नहीं उतर रही है। इसकी बड़ी वजह है- तुर्किये मेड जिगाना पिस्टल। यह पिस्टल भारत में बैन है। ब्लैक मार्केट में कीमत करीब 7 लाख रुपए है। इसी पिस्टल से 10 महीने पहले पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला की हत्या हुई थी।

जिन 3 बिंदुओं पर पुलिस जांच कर रही है उनमें एक है जैद, जो अतीक का पुराना गुर्गा है। एक वक्त जैद ही अतीक का पूरा काम देखता था। दूसरा, सुंदर भाटी गैंग, जो पश्चिमी यूपी का सबसे बड़ा गैंग है। चर्चा है कि भाटी गैंग का अतीक के साथ प्रॉपर्टी विवाद हुआ था। हत्या तुर्किये मेड पिस्टल से की गई। ऐसे में इस हत्याकांड ने इंटरनेशनल माफिया के कनेक्शन की तरफ भी पुलिस को सोचने के लिए मजबूर कर दिया है।

1. जैद गैंग: अतीक की प्रॉपर्टी डीलिंग, वसूली और किडनैपिंग के काम को संभालता था

जैद, अतीक के बेहद खास रहे आबिद प्रधान का दामाद है। जैद अतीक का दाहिना हाथ हुआ करता था। वह अतीक के हर काम को बेहद करीब से जानता था। उसका अतीक की प्रॉपर्टी डीलिंग, वसूली और किडनैपिंग के हर काम में हस्तक्षेप रहता था। वह अतीक के नाम पर गुंडा टैक्स भी वसूलता था, लेकिन 2018 में अतीक और जैद में संबंध बिगड़ गए।

सूत्रों के मुताबिक, 2018 में अतीक देवरिया जेल में बंद था। वहां से जैद को कहलवाया कि विश्रामपुर वाली जमीन से अपना कब्जा छोड़ दो, लेकिन जैद नहीं माना। इस पर अतीक नाराज हो गया। अतीक ने जैद को गुर्गों से किडनैप करवा कर देवरिया जेल में बुलवाया। वहां अपने सामने उसकी पिटाई करवाकर अधमरा कर दिया। धमकी भी दी कि जिस दिन “उमेशवा को मरवाऊंगा, 15 दिन नेशनल टीवी पर खबर चलेगी। उमेश की मुखबिरी तुम ही करोगे, नहीं की तो तुमको भी मरवा देंगे। इसलिए जमीन छोड़ दो। जब मैं कहूं तो रजिस्ट्री करवा देना।”

जैद ने पिटाई के 47 दिन बाद अतीक के खिलाफ FIR दर्ज करवाई। इसमें उमेश पाल का भी जिक्र किया। FIR 8 जनवरी 2019 को लिखवाई, लेकिन घटना 22 नवंबर 2018 की थी। यानी करीब डेढ़ महीने बाद।

बताया जा रहा है कि पुलिस की जांच लिस्ट में एक नाम इसी जैद का है। वजह ये है कि उमेश पाल हत्याकांड के बाद ताबड़तोड़ एक्शन से अतीक कमजोर पड़ रहा था। अतीक और अशरफ रिमांड पर थे। ऐसे में अतीक-अशरफ को निशाना बनाना आसान था। जैद, अतीक की नस जानता था। निश्चित तौर पर कई राज भी उसके पास होंगे।

अतीक की संपत्ति प्रयागराज से दिल्ली-मुंबई तक फैली है। यह कितनी है? इसका जवाब किसी के पास नहीं है। अनुमान है कि आंकड़ा 1200 करोड़ से अधिक का है। अतीक-अशरफ की मौत हो चुकी है। बाकी परिवार जेल में हैं या फरार है। क्या यह करोड़ों-अरबों की संपत्ति हत्या की वजह है। पुलिस इस एंगल को भी खंगाल रही है। ED ने 4 दिन पहले प्रयागराज में अतीक के 15 करीबियों के यहां छापे डाले थे। इसमें कई शेल कंपनियों के दस्तावेज भी मिले थे।

अतीक-अशरफ की यह फोटो हत्याकांड से कुछ देर पहले की है। इसके बाद ही हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें दोनों की मौत हो गई।
अतीक-अशरफ की यह फोटो हत्याकांड से कुछ देर पहले की है। इसके बाद ही हमलावरों ने ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें दोनों की मौत हो गई।

2. सुंदर भाटी गैंग: वेस्ट यूपी में ठेका, सुपारी और वसूली का साम्राज्य
दूसरा एंगल सुंदर भाटी गैंग का है। वेस्ट यूपी में वह 30 साल से अपराध की दुनिया में है। इस गैंग सुंदर भाटी गैंग वेस्ट यूपी में प्रॉपर्टी, ठेका, सुपारी लेकर हत्या, स्क्रैप का काम करता है। वह 8 साल से सोनभ्रद जेल में बंद है और उस पर 65 मुकदमे दर्ज हैं। इस वक्त उसका गैंग ही उसके साम्राज्य को संभाल रहा है।

वहीं, अतीक अहमद का भी वेस्ट यूपी में प्रॉपर्टी और वसूली का कारोबार था। अतीक की मेरठ में रिश्तेदारी भी है। इसी के चलते कई बार दोनों गैंग आमने-सामने आ जाते थे। दोनों के बीच गैंगवार भी हुई है।

पुलिस सूत्रों की मानें, तो सुंदर भाटी लंबे समय से अतीक को अपना सबसे बड़ा दुश्मन मानता था।

पुलिस को अब तक की अपनी जांच में भी यह पता चला है कि अतीक-अशरफ को मारने वाले तीनों शूटरों के पास जो पिस्टल मिली है, वह उसे सुदंर भाटी गैंग से ही मिली है। सुंदर भाटी के गैंग के सदस्य सोढ़ी ने यह पिस्टल सनी को हमीरपुर जेल में दी थी। सोढ़ी का भी मेरठ में काफी प्रभाव है। पिस्टल मेड इन तुर्किये है। एक पिस्टल की कीमत करीब 10 लाख रुपए है।

ये पिस्टलें पहले भी वेस्ट यूपी में हुई गैंगवार में इस्तेमाल होती रही हैं। सनी कुछ वक्त के लिए मेरठ जेल में भी बंद था। यहीं पर उसकी मुलाकात सुरेंद्र भाटी गैंग के लोगों से हुई थी। सूत्रों की मानें, तो इस हत्याकांड में इस गैंग का भी हाथ हो सकता है। गैंग अतीक और अशरफ की हत्या की फिरौती भी दे सकता है।

घटनास्थल पर तुर्किये मेड जिगाना पिस्टल मिली है। एक आरोपी ने इसी से फायरिंग की।
                        घटनास्थल पर तुर्किये मेड जिगाना पिस्टल मिली है। एक आरोपी ने इसी से फायरिंग की।

3. इंटरनेशनल माफिया का एंगल- जिस पिस्टल से अतीक-अशरफ मारे गए, उसी से सिद्धू मूसेवाला भी मारा गया था
अतीक-अशरफ की हत्या में लवलेश, अरुण और सनी ने जिन 3 पिस्टल का इस्तेमाल किया, उनके नाम 9 एमएम गिरसान पिस्टल और 9 एमएम जिगाना पिस्टल है। एक 7.62 बोर की देसी पिस्टल भी है। इनमें से जिगाना और गिरसान तुर्किये मेड पिस्टल हैं।

अब प्रयागराज पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि आखिर ये विदेशी पिस्टल यहां कैसे पहुंचीं? कारतूस भी भी काफी महंगे हैं। इनका इस्तेमाल अंडरवर्ल्ड के माफिया करते हैं। इन विदेशी पिस्टल को लेकर STF और ATS ने भी जांच शुरू कर दी है। झांसी में हुई मुठभेड़ में गुलाम और असद के पास वाल्थर और बुलडॉग पिस्टल मिली थी। उमेश हत्याकांड में भी विदेशी पिस्टल का इस्तेमाल हुआ था। सिद्धू मूसेवाला की हत्या में भी इसी पिस्टल का इस्तेमाल हुआ था। ये हथियार भारत में प्रतिबंधित हैं।

एक पुलिस अधिकारी के मुताबिक, 9 एमएम पिस्टल का इस्तेमाल बड़े माफिया भी कर रहे हैं। इसकी बड़ी वजह ये है कि इसे आसानी से चलाया जा सकता है, इसके फायर मिस भी कम करते हैं।

इसके अलावा पुलिस शुरुआती तथ्यों के आधार पर पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और पंजाब कनेक्शन की भी जांच कर रही है, क्योंकि रिमांड के दौरान अतीक ने पुलिस को दिए बयान में बताया था कि उसका ISI और लश्कर-ए-तैयबा से संबंध है।

पाकिस्तान का हैंडलर ड्रोन के जरिए पंजाब में हथियार गिराता था। फिर उसकी सप्लाई जम्मू-कश्मीर के आतंकियों और गैंग के लोगों को होती थी।

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