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मुकेश अंबानी ने किया बड़ा फैसला! भारत का सबसे बड़ा आईपीओ जल्द आ सकता है बाजार में

JIO

रिलायंस जियो इन्फोकॉम (Reliance Jio Infocomm) अपने मोबाइल रिचार्ज महंगा करने और 5जी बिजनेस को मोनेटाइज करने की दिशा में सबसे आगे नजर आ रही है। यह संकेत दे रहा है कि टेलीकॉम मार्केट लीडर जियो, भारत के सबसे बड़े आईपीओ (IPO) के लिए तैयार हो रही है। विश्लेषकों का मानना है कि अगले साल की शुरुआत में जियो का आईपीओ (Jio IPO Date) आ सकता है। उम्मीद है कि रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (RIL) की आगामी सालाना आम बैठक (RIL AGM) में जियो के विशाल आईपीओ पर कुछ स्पष्टता मिलेगी।

### प्लेटफॉर्म तैयार, निवेशकों की निगाहें

विशेषज्ञों का कहना है कि टेलीकॉम मार्केट लीडर के बहुप्रतीक्षित आईपीओ के लिए मंच अब तैयार हो चुका है। टैरिफ हाइक और 5जी कारोबार से आने वाली तिमाहियों में जियो की प्रति यूजर एवरेज इनकम (ARPU) में वृद्धि होगी, जिससे कंपनी आईपीओ से पहले संभावित निवेशकों के लिए और अधिक आकर्षक बन जाएगी।

### जियो का वैल्यूएशन और संभावित शेयर बिक्री

ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि आगामी रिलायंस एजीएम में जियो की लिस्टिंग के बारे में किसी भी नए डेवलपमेंट का इंतजार है। जेफरीज ने बताया कि मोनेटाइजेशन पर बढ़ता फोकस इसकी जल्द लिस्टिंग का बड़ा संकेत हो सकता है। जेफरीज के अनुसार, ताजा टैरिफ हाइक और 5जी मोनेटाइजेशन के बाद जियो की वैल्यूएशन करीब 11.11 लाख करोड़ रुपये है। इस वैल्यूएशन के आधार पर जियो का आईपीओ भारत का अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ होगा।

वर्तमान नियमों के अनुसार, ₹1 लाख करोड़ या उससे अधिक के मूल्यांकन वाली कंपनियों को आईपीओ में कम से कम 5% हिस्सेदारी बेचनी होती है। इसका अर्थ है कि जियो की शेयर बिक्री जेफरीज द्वारा दिए गए वर्तमान मूल्यांकन के आधार पर ₹55,500 करोड़ रुपये मूल्य की हो सकती है।

### अब तक के सबसे बड़े आईपीओ

भारत में अब तक का सबसे बड़ा आईपीओ 2022 में सार्वजनिक क्षेत्र की जीवन बीमा निगम (LIC) का ₹21,000 करोड़ से अधिक का ऑफर रहा है, जब उसने एक विशेष मामले के रूप में केवल 3.5% हिस्सेदारी बेची थी। इस बीच, हुंडई मोटर की भारतीय इकाई ने पिछले महीने 17.5% हिस्सेदारी बेचकर ₹25,000 करोड़ तक जुटाने के लिए नियामकीय मंजूरी मांगी थी।

### रिलायंस इंडस्ट्रीज की हिस्सेदारी

मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली रिलायंस इंडस्ट्रीज Jio Platforms Ltd (JPL) में 67.03% की हिस्सेदारी रखती है, जिसमें रिलायंस की दूरसंचार और डिजिटल संपत्तियां शामिल हैं। दूरसंचार व्यवसाय JPL के अधिकांश कार्यों का हिस्सा है। शेष 32.97% में से 17.72% सामरिक निवेशकों मेटा और गूगल के पास सामूहिक रूप से है। जबकि विस्टा इक्विटी पार्टनर्स, केकेआर, पीआईएफ, सिल्वर लेक, एल कैटरटन, जनरल अटलांटिक और टीपीजी सहित वैश्विक पीई निवेशकों के पास शेष 15.25% हिस्सेदारी है। JPL ने 2020 में इन मशहूर वैश्विक निवेशकों से ₹1.52 लाख करोड़ से अधिक जुटाए थे।

### निष्कर्ष

जियो का आईपीओ भारत के टेलीकॉम बाजार में एक नया इतिहास रच सकता है। मुकेश अंबानी के इस बड़े फैसले से न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज को फायदा होगा, बल्कि भारतीय शेयर बाजार में भी एक नई लहर आ सकती है। अब सबकी निगाहें रिलायंस की आगामी एजीएम पर टिकी हैं, जहां जियो के आईपीओ पर महत्वपूर्ण घोषणाएं हो सकती हैं।

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